पास मैं उन के जाने लगी हूँ
नैनों में उनको छुपाने लगी हूँ
मन में उन का नाम बसा कर
सपने मिलन के सजाने लगी हूँ
इंतजार में अक्सर उन्ही के
ग़ज़ल मैं गुनगुनाने लगी हूँ
वक्त-बेवक्त ख्वाबो में खोकर
नींद अपनी उडाने लगी हूँ
नई ख़ुशी मिली है मुझको
चैन अपना गंवाने लगी हूँ
मुझको मोहब्बत हो गयी हैं
अकेले में मुस्कराने लगी हूँ




आप ने कहा