Posted by: कल्पना भारती | अक्टूबर 15, 2009
नेह का दीपक मैं बारती
नेह का दीपक मैं बारती
प्रियतम तोहे पुकारती
आजा प्रिय…
दिवाली की शाम है छाई
पूजन पाठ मैं कर आई
आँगन चौखट मुंडेर पे,
फुलमालायें मैं संवारती
आजा प्रिय…
मेहंदी माहवर मैंने लगाये
रंगोली भी हैं सजाये,
काजल बिंदिया श्रींगार कर
रूप सुंदर अपना निखारती
आजा प्रिय…
आनंद उत्साह के साथ आना
प्यार भरा कोई सौगात लाना
कटोरी भर मिष्ठान लिए,
पल पल द्वार को निहारती
आजा प्रिय…
मेरे संग तुम पंख लगाओ
कोई तिलिस्मी लोक घुमाओ
अमर कथा की अप्सरा बन,
उतारूँ मैं तुम्हारी आरती
आजा प्रिय…
कुछ ऐसे तुम मनुहार करो
प्रेम की शीतल बौछार करो
तन मन कर दो झंकृत,
विरह वेदना अब बिसारती
आजा प्रिय…
नेह का दीपक मैं बारती
प्रियतम तोहे पुकारती ॥
~~~शुभ दीपावली~~~
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दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामना…
By: mahendra mishra on अक्टूबर 15, 2009
at 5:18 अपराह्न
कुछ ऐसे तुम मनुहार करो
प्रेम की शीतल बौछार करो
तन मन कर दो झंकृत,
विरह वेदना अब बिसारती
आजा प्रिय…
बहुत सुन्दर रचना
सुख, समृद्धि और शान्ति का आगमन हो
जीवन प्रकाश से आलोकित हो !
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दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए
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By: Creative Manch on अक्टूबर 16, 2009
at 8:23 अपराह्न
नेह का दीपक मैं बारती
प्रियतम तोहे पुकारती ॥nice
By: loksangharsha on अक्टूबर 20, 2009
at 6:48 पूर्वाह्न
प्यार ,मनुहार,जज्वात सारे एहसास समेटे है ये रचना बहुत सुंदर.
By: Shikha on अक्टूबर 20, 2009
at 3:01 अपराह्न