About me

हल्के फुल्के नन्हे नन्हे विचारों वाली एक भोली सी कल्पना.

विचार जब छोटे होते हैं तो बहुत तेजी से दौड़ते हैं जैसे नन्हे नन्हे गिलहरियाँ. कभी ठीक से पकड़ में आते नहीं. सूक्ष्म से सुक्ष्तम रूप में बस जेहन में छुपे होते हैं. हर पल बीतने के साथ ही इनकी तादाद भी बढती जाती है. मुझे महसूस होता है ये उड़ना चाहते हैं. ठीक मेरी तरह क्षितिज तक फैलना चाहते हैं. क्यूँ न इनको पंख लगा दूं.


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Responses

  1. बहुत सुन्दर रचना । आभार

    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com


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